प्यार नियति का खेल

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4 thoughts on “प्यार नियति का खेल

  1. akdam naveen,original rachna—superlike
    yadi pyaar pe kavya ,prem-granth ki rachna yadi vidhi vidhan kar rahe hai to shodh-karta na ban patra chitran karna hi uttam hai,
    want to play in without analytical loving——

  2. हृदय की गहराई से लिखी यह कविता कभीं नहीं विस्मृत होती है , पहले भी पढ़ चुकी हूँ , अक्सर इस कविता को याद किया , आज आपके ब्लाग पर शायद पांचवीं या छठीं बार पढ़ रही हूँ …कविता बड़ी जीवंतता लिए हुए है , इस कविता का एक एक शब्द झकझोर कर रख देता है मन कहता है अद्भुत क्षमता और योग्यता है आपकी लेखनी में !
    अद्भुत !!

    • तीन साल पुरानी इस कविता को पुनः जीवान्त कर पुराने दिनों की याद दिला दी, प्यार पर कई कविताएँ लिखी हैं उसी में से ये भी एक है, लेकिन मेरे अन्दर का कवि आज भी यह नहीं समझ पाया है की प्यार आखिर क्या है, इस पर मेरी कविताएँ आगे भी आती रहेंगी जैसे जैसे मैं इसके बारे में कुछ नया सीखूंगा समझूंगा

      • प्यार का मतलब लद्दाख को देखने बार बार जाने और उसमें खो जाने की आकांक्षा जैसा ही कुछ है , वहाँ की तीक्ष्णता में दम घुटने के बावजूद उसे चाहते रहने की भावना ही प्यार है ,— जीवन जीना ही प्यार है और ऐसा जीवन जिसमें हम अच्छे बुरे सबको स्वीकार करें ,ऐसी क्षमता विकसित करने को शायद !!

        कवि की कविता में भावों की निरंतरता प्यार की वास्तविक व्यापकता और व्याख्या ढूंढ ही लेती है और अर्थ भी समझ लेती है —

        बस आप नये नये शोध करते रहें , नई नई कविताएँ लिखते रहें , सीखते और समझते रहें

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