जिंदगी की धूप छांव

Slide48

अतीत में जा कर नयी शुरुआत नहीं होती।

योद्धाओं की जिन्दगी में धूप छांव नहीं होती।।

आयुर्बल उर्जा से जीवित रखते हैं जीवन को।

आचरण से नियत करते उदहारण, स्थापित करें साम्राज्य को।।

सक्रिय अस्तित्व कार्यकाल से नीति बना।

युग युगान्तर आजीवन, योद्धा रहें आयुष्मान।।

भीड़ से अलग जन हितैषी सिपाही।

चलते चले जाते हैं, धूप छांव से बेपरवाह।।

चूँकि वोह योद्धा हैं और।

योद्धाओं की जिन्दगी में धूप छांव नहीं होती।।

जिन्दगी की कभी शाम नहीं होती।

सदैव निरंतर सदा सर्वदा सिर्फ सुबह ।।

 

Human are born fighter they never concedes defeat… so life has only beginning and there is no end to life, 

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4 thoughts on “जिंदगी की धूप छांव

  1. बहुत शानदार लिखा है सर..

    जीवन उम्मीदों का प्यारा-सा गाँव है।
    कभी धूप ग़म की है, कभी सुख की छाँव है।।

    • धन्यवाद रितेश,
      कालांतर से जिंदगी एक युद्ध की तरह जी है, कर्म के दिनकर से उम्मीद की छांव हमेशा रही है ।
      आशावाद, छायावाद से कहीं बेहतर है, कविता के माध्यम से हमेशा यही प्रतिबिम्बित करने की कोशिश करता हूँ ।

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