यादों के शहर

यादों के इस शहर में।

तेरी बाँहों के आलिंगन से दूर।

इस टूटे दिल के सहारे।

व्यथा मनोव्यथा को समेटे।

मन केंद्र छिपा सार तत्व।

क्या कहता है ?

सागर कि लहरों का उन्माद।

अशांत उग्र उपद्रवी हृद्य।

तेरे केशों का मायाजाल।

ताने बुन गहन कोनों को कुरेद।

क्या कहता है ?

कल्पना के इस व्याख्यान में।

कहावतों कहानियों के उदाहरण परोसता।

अनोखी अनुभवी  विश्वव्याखा।

निर्दयी अकल्पित अचल सत्य।

क्या कहता है ?

वस्तुतः यथार्थवाद।।

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4 thoughts on “यादों के शहर

  1. यादें। मीठी, जिनमें हम खो जाना पसंद करते हैं और कड़वी, जो हमें परेशान करती हैं, डराती हैं। यादें, चाहे जैसी भी हों, हमारी ज़िन्दगी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। यादें, हमें अतीत की गहराइयों में ले जाती हैं और पथ प्रदर्शक की तरह काम करती है, लेकिन यही यादें यथार्थ से भी परिचय कराती हैं।
    यादों के बारे में काफी सोचकर ये लिख पाया हूँ सर। गद्यात्मक शैली में और सरल शब्दों में इस विषय पर आपके विचार जानने को उत्सुक हूँ।

    • यादें चाहें जैसी भी हों महत्वपूर्ण होती हैं मेरा मानना है की वोही व्यक्ति खुश है जो भुलाने और भुलाने की शक्ति रखता है , क्योंकि यादें उसे कभी नहीं सतातीं. जहाँ तक यथार्थवाद का सवाल है उससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता. जिन्दगी का असली आनंद आज में जीने से है कल में मरने से नहीं

  2. यादें सताती वही होंगी जिनमें कुछ दर्द या जिन्दगी में कोई दुःख देने वाली घटना जुड़ी हो. मीठी यादें या प्रसन्न करने वाली यादें थोडा बहुत जीवन में सुख दे देती हैं . जीवन में कडवे मीठे सभी अनुभव जो यादें बन जाते हैं सच में सिखा जाते हैं. खुद के अनुभव से तो मुझे लगता है जीवन में जिसने ये सब अनुभव नहीं किया उसका जीवन अधूरा है . नजर अंदाज कर देना संभव होता है भुलाना नहीं . यथार्थ में जीना ही जीना है …”निर्दयी अकल्पित अचल सत्य” स्वीकार कर आगे बदना ही सफल जीवन की कुंजी है….कल …का मतलब tomorrow and yesterday है …आज में जियो …क्योंकि अभी इसी वक्त वह कल बन जायेगा …कविता वैसे पता नहीं क्यों दिल को उदास कर देती है ..पर आख़री पंक्ति फिर अपने आप सब स्थिर कर देती है …

    • Remembrance verses memories both are yaden but different…
      Life’s experiences is yet another thing, yes everyday as we live we experience things, some good some bad and each of life’s experience leaves a mark on our memories. I wish I had more of sweet remembrance than bitter memories.. as I always say its pain that brings out the creativity, stimulates the thought just like the carbon di oxide that makes you breathe and not the oxygen… live more experience more and suffer more,,, not done

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