अनुष्का का इंतजार

032

अंधकार ये डरावना अंधकार ।

कहाँ तक फैला है ।।

धुंद की मैली चादर ओढे ।

रौशनी की एक एक किरण को तरसता ।

उजाले की झलक से भागता ।

ये अंधकार ।।

दूर छितिज़ के तले ।

सीने में एक कसक लिए ।

अनुष्का की एक चमक का इंतज़ार ।

सिर्फ एक बार ।।

आसमान को चीर कर ।

अम्बुज का सीना फाड़ ।

हे तडित ।

तामस भगा जा ।

इस अंधकार में रास्ता दिखा जा ।।

देख कहीं पथिक भटक न जाए ।

अंधकार, घोर अंधकार चहुँ और फैला है ।

क्या लक्ष्य प्राप्ति है असंभव ।

नहीं कभी नहीं ।।

विजय तो हमेशा सच्चाई की होती है ।

यही परम सत्य है, ज्योतिर्मय सत्य ।।

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