लक्ष्मी का इंतज़ार

रात भर इंतज़ार करते रहे तेरा

फूलों की सेज पर

अखंड दीप जला कर

पर तुम नहीं आई׀

 

फलों और मिठाइयों के ढेर सजाये

दीप जलाये,

खिड़की दरवाजे भी खुले रखे

की तुम आओगी, वैभव विलास लाओगी  ׀

 

लाओगी अपने साथ खुशहालियां

भर दोगी  झोलियाँ, उपहारों से

पर तुम जालिम

पडोसी के घर चली गयी ׀׀

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मैंने उड़ना सीख लिया (I learned to fly)

मैंने उड़ना सीख लिया,

बिना पंखो के,

नीले आसमान पर,

भूमंडल से दूर,

दिनकर के पथ में,

आदित्य के साथ,

शशि की चन्द्रिका के
आगोश में

न धूल, न धूँआ

न ही शोरगुल,

न भीड़,

और न ही तुम׀

I finally learned to fly without the wings. Away from the mother earth in the blue sky, away from the dust, smoke, noices, people. In the path of the sun with the sun and with the moon’s moonlight in my arms. And yes, without you.

दूसरो के सपने (others’ dreams)

पंख अपने हैं, आशियाने अपने हैं

उड़ान अपनी है स्वाभिमान अपने हैं

नदी अपनी है, पहाड़ अपने हैं

थकान अपनी है, अंदाज अपने है

भूख अपनी है, भूखे भी अपने है

कर्म अपने हैं, परिणाम अपने हैं

आसमा के भी आयाम अपने है

हाँ सपने, वो दूसरो के लिए देखते हैं

I fly with my own wings. Fly over the mountains and the rivers and return home, my home when I am tired and hungry. I do what I have to for others, and am ready for the outcome, whatever it is. All outcome good or bad are mine as the work is mine, i own full responsibility. I am free and do what I have to with full self-esteem. But.. when I dream, I dream for others

सियाराम

आजकल हर व्यक्ति

रावण बनना चाहता है

राम के हाथ मर

अमृत्व प्राप्त करना चाहता है

 

और सीता, कोई नारी

नहीं बनना चाहती

वनवास और अग्निपरीक्षा

कुछ नहीं, सिर्फ लाचारी

३०.९.१७

पंथ संचालन

मैं न तो वामपंथी हूँ, न दक्षिणपंथी,
मैं न तो पूर्व गामी हूँ न पश्चिम,
मैं परिधि के परिमंडल में भी नहीं रहता ,
मैं एक आज़ाद पंछी हूँ ׀

उड़ता हूँ तो अपनी मर्जी से,
बैठता हूँ तो भी अपनी मर्जी से ,
लिखता हूँ तो भी अपनी मर्जी से ,
मैं हूँ अपनी मर्जी का मालिक ׀

मेरी सोच न किसी की खरीदी हुई है,
और न ही किसी की गुलाम,
मैं हूँ आज़ाद भारत का आज़ाद नागरिक ׀׀